👉 सीएफओ का यह कृत्य उत्तर प्रदेश भवन नियमावली और भारतीय भवन संहिता के खिलाफ
👉 सीएफओ ने 50 बेड तक के हॉस्पिटल कों रास्ते तक की चौडाई के निर्धारण की अनदेखी की है
मऊ (एफ आई नेटवर्क)। जिले के मुख्य अग्नि समन अधिकारी ने उत्तर प्रदेश भवन नियमावली व भारतीय भवन संहिता कों ताक पर रख कर निर्मित निजी नर्सिंग होम्स के नाम अनापति प्रमाण पत्र जारी कर विभाग भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। विभाग ने गलियों तक मे मौजूद हॉस्पिटल के नाम अनापति प्रमाण पत्र जारी किया है तों ऐसे भी हॉस्पिटलस के नाम अनापति प्रमाण पत्र जारी किया है जिनके भवन (रिहायसी भी ) के नक्शे पास नहीं है। लेकिनवे आज भी धड़ल्ले से संचालित हो रहे है।
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश भवन नियमावली व भारत भवन संहिता के खिलाफ निर्मित हॉस्पिटल के नाम विभाग जिस तरीके से अनापत्ति प्रमाण पत्र बाँट रहा है, उससे कभी ही भारी पैमाने पर नुकसान की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा है।
सीएफओ ने नियमों कानून कायदो कों ठेंगे पर रख कर गलियों मे स्थित हॉस्पिटलो के नाम NOC जारी की है। जिनको “फायर एंड सेफ्टी” की दृस्टि से मुख्य अग्नि समन अधिकारी के द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिया जाना चाहिए
गलियों मे स्थित हॉस्पिटलस
👉प्रतिमा हॉस्पिटल
,👉 बंदना नर्सिंग होम,
👉ललिता हॉस्पिटल,
👉 गुप्ता सर्जिकल हॉस्पिटल,
👉शल्यक अस्पताल,
👉किलकारी नर्सिंग होम,
👉 स्वस्तिक हॉस्पिटल
👉 फातिमा हॉस्पिटल,
👉 समीर हॉस्पिटल,
👉अलशीफा हॉस्पिटल आदि
सीएफओ ने गलियों मे स्थित हॉस्पिटलो के नाम तों अनापत्ती प्रमाण पत्र जारी ही किया है, ऐसे हॉस्पिटल के भी नाम अनापत्ती प्रमाण पत्र जारी किया है जिनके भवन, भारतीय भवन संहिता 2005 के खिलाफ निर्मित है, जिनमे ये है हॉस्पिटलस
👉 बापू हॉस्पिटल,
👉मित्तल नर्सिंग होम
👉 बिंदु अस्पताल,
👉 श्याम संजीवनी हॉस्पिटल
👉 प्रकाश हॉस्पिटल ट्रामा सेंटर,
👉आशीष नर्सिंग होम
👉जीवन ज्योति अस्पताल
👉 हलीमा केयर सेंटर, प्रतिमा मैटेर्निति
👉 शिवम् लाइफ केयर
👉अंजलि हॉस्पिटल
,👉 सत्यम हॉस्पिटल
,👉 राहुल. हॉस्पिटल,
विभागीय अफसरों ने इस तरह की भी मनमानी की है कि जिन हॉस्पिटलो के भवन के नक्शे ( रिहायसी मे भी ) तक स्वीकृत नहीं है, विभाग ने उनके नाम अनापत्ती प्रमाण पत्र जारी किया है। मऊ ! जिले में अबैध हॉस्पिटलों में हुई चार मौतों के बाद शासन प्रशासन द्वारा जिले में की जा रही जांच में जाँच अधिकारियो ने पड़िया अधिकारों का जिस तरिके से कुरुप्योग किया है उससे जिले में अबैध हॉस्पिटलों का प्रबंधन और मजबूत हुआ है ! जिम्मेदारों ने पंजीकृत हॉस्पिटलों को केवल इस आधार पर वैध मान कर जाँच की है की उनका विभागीय में पंजीकरण है ! जबकि पंजीकृत हॉस्पिटलों में अबैधता के प्रमाण है ! अधिकांश हॉस्पिटलों ने पंजीकरण के दौरान तथ्यों का छुपाव और कूट रचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है ! इन तथ्यों की जाँच हुए बिना जिले में अबैध होस्पिटलाओ से जिले को छुटकारा नहीं मिलाने वाला है ! न्यायहित और समाजहित में इन पंजीकृत हॉस्पिटलों की भी जाँच जरुरी है !
नोट :- उपरोक्त सभी हॉस्पिटलो के भौतिक सत्यापन के दौरान नेशनल बिल्डिंग कोड व उत्तर प्रदेश बिल्डिंग बाइलाज मे उल्लिखित दिशा निर्देशों से तुलना करने और विभाग द्वारा 2015-16 मे उपलब्ध कराई गईं हॉस्पिटलो की सूची के आधार पर खबर का प्रकाशन किया जा रहा है। यदि किसी हॉस्पिटल प्रबंधन को आपत्ति हो तो कृपया इस बात के साक्ष्य के साथ कि उनके भवन नेशनल बिल्डिंग कोड २००५ और उत्तर प्रदेश भवन नियमावली के अनुसार निर्मीत है , फर्स्ट इनफार्मेशन से सम्पर्क कर सकते है, उनके द्वारा दिए गए समस्त तथ्यों डीके न्यायहित और समाजहित में प्रकाशन किया जायेगा ा
