–जिले मे इलाज के दौरान चार मौत के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय से जाँच के आदेश के बाद अबैध हॉस्पिटलो को पंजीकृत कर सीएमओ ने गायब कर दिया अबैध हॉस्पिटल, अबैध बन गए वैध
— पंजीकरण मे सीएमओ ने हॉस्पिटलो के पहुंच मार्ग को लेकर उयलब्ध मानकर तक की की अनदेखी. किसी के पहुंच मार्ग नहीं है 10-20 फिट से अधिक चौड़े मार्ग
मऊ( एफ आई नेटवर्क). मुख्य चिकित्साधिकारी के द्वारा पूरे जिले मे अबैध हॉस्पिटलो को पंजीकृत करने का खुला खेल खेला जा रहा है। सीएमओ के इस कार्यप्रणाली मे न तों प्रस्तावित हॉस्पिटल के भवन को मानक के अनुरूप होने की जरुरट है न हॉस्पिटल संचालन के अन्य मानकर को पूरा करना आवश्यक है। एफआई नेटवर्क ने सीएमओ के द्वारा पंजीकृत अधिकांश अबैध होसोटालो का जायजा लिया, उनके भवन के नक्शो की नियत प्राधिकारी के द्वारा की गईं स्वीकृति की भी तहकीकात की, अधिकांश हॉस्पिटलो को 10 से 20 फिट चौड़े रास्ते मे मौजूद पाया गया।
तफ्तीश मे एफ आई नेटवर्क ने सीएमओ के द्वारा हॉस्पिटलो के किये गए पंजीकरण और हॉस्पिटल का भौतिक सत्यापन किया जिसमे सीएमओ की कार्यशैली को उजागर करने की समाजहित मे जरूरत महसूस किया गया।
सीएमओ ने जिन हॉस्पिटलो का पंजीकरण किया है उसमे से अधिकांश हॉस्पिटलो के भवन को नियत प्राधिकारी के द्वारा प्रोविशनली स्वीकृत नहीं दिया गया पाया गया बावजूद इसके सीएफओ के द्वारा अग्नि सामन की अबैध तरीके से जारी एनओसी के आधार पर सीएमओ ने अधिकांश अबैध हॉस्पिटलो का पंजीकरण कर उनको वैध होने का प्रमाण पत्र दें दिया गया है।
सीएमओ की इस कार्यशाली मे जिले मे अब अबैध हॉस्पिटल शेष नहीं रहे, जितने अबैध थे सभी को सीएमओ ने पंजीकृत कर उसको वैध होने का प्रमाण पत्र दें दिया है। बताते चले कि जिले मे इलाज के दौरान हुई चार मौतो के बाद जिले मे अबैध हॉस्पिटलो की स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने जांच का फरमान जारी किया था। इस जाँच को लेकर जिले मे सच मे अबैध संचालित हॉस्पिटलो के बींच हलचल व दहशत देखी गईं थी।
इसी दहशत के बीच सीएम ओ ने स्वास्थ्य मंत्रालय से मिलकर जो खेल खेला उसमे सभी अबैध हॉस्पिटलो को ही पंजीकृत कर वैध बना दिया गया। पंजीकृत किसी भी हॉस्पिटल के भवन के नक्शे को नियत प्राधिकारी के द्वारा प्रोविशनली स्वीकृत नहीं मिलने के बावजूद सीएफओ द्वारा जारी अबैध एनओसी पर सीएमओ ने अधिकांश अबैध हॉस्पिटलो को पंजीकृत कर वैध बना कर पाकेट गर्म कर ली है।
अधिकांश हॉस्पिटलो के भवन नेशनल बिल्डिंग कोड 2005 और यूपी बिल्डिंग बायलॉज के खिलाफ है। पंजीकरण के दौरान सीएम ओ ने हॉस्पिटलो तक पहुंच मार्ग को लेकर उपलब्ध क़ानून कायदो मे 18 मीटर चौड़े मार्ग की अनदेखी कर, अबैध हॉस्पिटलो को पंजीकृत करने का अपराध किया है जिसको लेकर सरकार को कार्यवाही करनी चाहिए।
